Vastu For Temple: घर का मंदिर से सकारात्मक ऊर्जा पूरे घर में संचारित होती है। हालांकि, वास्तु शास्त्र के अनुसार, अनजाने में पूजाघर में रखी गई कुछ मूर् …और पढ़ें
Publish Date: Sat, 17 Jan 2026 10:38:24 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Jan 2026 10:38:24 AM (IST)
धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में घर का मंदिर सबसे पवित्र और ऊर्जावान स्थान माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से सकारात्मक ऊर्जा पूरे घर में संचारित होती है। हालांकि, वास्तु शास्त्र के अनुसार, अनजाने में पूजाघर में रखी गई कुछ मूर्तियां ‘वास्तु दोष’ का कारण बन सकती हैं। इनसे न केवल आर्थिक तंगी आती है, बल्कि परिवार में गृह-क्लेश भी बढ़ सकता है।
ज्योतिष शास्त्र और वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आपके मंदिर में नीचे बताई गई मूर्तियां हैं, तो उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए।
1. खंडित या टूटी हुई मूर्तियां
पूजाघर में कभी भी ऐसी मूर्ति नहीं रखनी चाहिए जिसका कोई हिस्सा टूटा हुआ हो या जिसका रंग उतर गया हो। शास्त्रों के अनुसार, खंडित मूर्तियों की पूजा करने से सकारात्मक फल प्राप्त नहीं होता, बल्कि घर में नकारात्मकता बढ़ती है। ऐसी मूर्तियों को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करना चाहिए या पीपल के पेड़ के नीचे रख देना चाहिए।
2. भगवान का ‘रौद्र रूप’
घर के मंदिर में हमेशा शांत और आशीर्वाद देती मुद्रा वाली मूर्तियां ही शुभ मानी जाती हैं। भगवान शिव का तांडव स्वरूप या कालभैरव जैसी क्रोधित मुद्राओं वाली तस्वीरें घर में मानसिक अशांति पैदा कर सकती हैं। सौम्य स्वरूप की प्रतिमाएं घर में शांति और भाईचारा लाती हैं।
3. एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां
वास्तु शास्त्र कहता है कि एक ही भगवान की दो या उससे ज्यादा मूर्तियां एक ही स्थान पर रखने से बचना चाहिए। ऐसा करने से ऊर्जा का टकराव होता है, जो घर के मुखिया के मानसिक तनाव और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
4. आमने-सामने न रखें मूर्तियां
अक्सर लोग जगह की कमी के कारण मूर्तियों को एक-दूसरे के सामने रख देते हैं। जानकारों के अनुसार, मूर्तियों का चेहरा एक-दूसरे के सम्मुख होने से पारिवारिक सदस्यों के बीच मतभेद और कलह की स्थिति पैदा होती है।
रख-रखाव का रखें विशेष ध्यान
- केवल मूर्तियां रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित सेवा भी जरूरी है।
- मूर्तियों पर धूल जमना या पुराने सूखे फूलों का रखे रहना दुर्भाग्य को निमंत्रण देता है।
- यदि घर में ‘लड्डू गोपाल’ विराजमान हैं, तो उनकी नियमित सेवा और भोग अनिवार्य है।
पूजाघर आपकी श्रद्धा का केंद्र है, इसे केवल सजावट का स्थान न समझें। इस शनिवार या किसी भी शुभ तिथि पर अपने मंदिर का निरीक्षण करें और वास्तु के अनुरूप बदलाव करें ताकि आपके जीवन में सुख-शांति और अपार सफलता बनी रहे।







