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जब गावस्कर की पहल ने रचा इतिहास: सचिन को यॉर्कशायर लाने के पीछे की अनकही कहानी | Parmarth TV

जब गावस्कर की पहल ने रचा इतिहास: सचिन को यॉर्कशायर लाने के पीछे की अनकही कहानी | Parmarth TV

क्रिकेट इतिहास में 1992 का साल एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया, जब यॉर्कशायर काउंटी क्लब ने पहली बार किसी विदेशी खिलाड़ी को साइन किया — और वह थे 19 वर्षीय सचिन तेंदुलकर। लेकिन इस करार के पीछे एक दिलचस्प दास्तां छिपी हुई है, जिसमें सुलेमान 'सॉली' आदम और भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर की अहम भूमिका थी।

कैसे शुरू हुई कहानी?

सुलेमान आदम, एक क्रिकेट प्रेमी, जो भारत के विभाजन के बाद गुजरात से कराची और फिर लीड्स (यॉर्कशायर) में आ बसे। वे सालों से भारतीय खिलाड़ियों को इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट से जोड़ते रहे हैं। जब 1992 में यॉर्कशायर ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज क्रेग मैकडरमॉट को अपना पहला विदेशी खिलाड़ी बनाया, तो वह चोटिल हो गए। यही वह मौका था, जब सुलेमान ने तेजी से कार्रवाई की।

"मैं दौड़कर यॉर्कशायर क्लब पहुंचा"

सुलेमान बताते हैं:
"जैसे ही मुझे मैकडरमॉट की चोट के बारे में पता चला, मैं भागकर यॉर्कशायर क्लब गया। मैंने उनसे कहा — 'आप सचिन तेंदुलकर या जावेद मियांदाद को क्यों नहीं साइन करते?' यहां की एशियाई आबादी को देखते हुए यह कदम सही रहेगा।"

सुलेमान ने उन्हें यह भी याद दिलाया कि उस वक्त महान डॉन ब्रैडमैन तक कह चुके थे कि "तेंदुलकर को बल्लेबाजी करते देखना मेरे खुद के खेलने की याद दिलाता है।"

यॉर्कशायर की मंजूरी, लेकिन…

क्लब के अधिकारी आखिरकार मान गए और फैसला हुआ कि तेंदुलकर को साइन किया जाए। लेकिन समस्या ये थी कि उन्हें यह नहीं पता था कि सचिन से संपर्क कैसे किया जाए।

उस समय सचिन ऑस्ट्रेलिया में सीरीज खेल रहे थे और वह इस प्रस्ताव को लेकर आश्वस्त नहीं थे।

तब सुनील गावस्कर ने निभाई अहम भूमिका

जब तेंदुलकर झिझक रहे थे, तब सुलेमान ने अपने दोस्त सुनील गावस्कर से संपर्क किया, जिन्होंने खुद काउंटी क्रिकेट में सोमरसेट के लिए खेलते हुए अच्छे अनुभव लिए थे।

सुलेमान याद करते हैं:
"मैंने गावस्कर से कहा, ;तुम सचिन से बात करो, वह युवा है, और ये उसका करियर बना सकता है। गावस्कर ने बात की और फिर इतिहास बन गया।"

सचिन का प्रदर्शन

यॉर्कशायर के लिए सचिन ने कुल 16 फर्स्ट-क्लास मैच खेले, जिसमें उन्होंने 1070 रन बनाए औसतन 46.52 के साथ। यह न केवल यॉर्कशायर क्लब के लिए एक ऐतिहासिक अध्याय था, बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी एक बड़ा पल था।

क्यों यह डील खास थी?

  • यह पहली बार था जब यॉर्कशायर ने विदेशी खिलाड़ी को साइन किया।

  • इससे पहले क्लब की नीति थी कि केवल यॉर्कशायर में जन्मे खिलाड़ी ही टीम का हिस्सा बन सकते हैं।

  • इस डील ने भारतीय खिलाड़ियों के लिए काउंटी क्रिकेट में नए रास्ते खोले।

1992 की यह डील केवल एक खेल अनुबंध नहीं थी, बल्कि क्रिकेट इतिहास में दो महापुरुषों – सुलेमान आदम और सुनील गावस्कर – के योगदान से संभव हुई वह कहानी थी जिसने सचिन तेंदुलकर को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी। आज जब हम सचिन के अंतरराष्ट्रीय करियर की बात करते हैं, तो यॉर्कशायर के उस पड़ाव को नहीं भूलना चाहिए, जो इस सफर की नींव साबित हुआ।

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