इंटरनेट डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बार फिर से नोबेल शांति पुरस्कार पाने का सपना टूट गया है। इस बार का ये पुरस्कार भारतीय मूल की दक्षिण-अफ्रीकी नागरिक नवी पिल्लई को मिला है। इनके दादाजी तमिलनाडु निवासी थी। नवी पिल्लई कानून विशेषज्ञ और रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं।
भारतीय मूल के तमिल परिवार में जन्मीं पिल्लई का जन्म 23 सितंबर, 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ। उन्हें मुश्किल से मुश्किल मामलों को शांति से हल करने के लिए जाना जाता है। इसी को देखते हुए नवी पिल्लई को नोबेल समिति ने शांति के सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया है।
नोबेल समिति ने सर्वोच्च शांति पुरस्कार के लिए नवी पिल्लई के नाम की घोषणा करते हुए कहा कि उनका काम शांतिपूर्ण ढंग से विवादों को सुलझाने, ताकतवर देशों और व्यक्तियों को जवाबदेह ठहराने और पीड़ितों की सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय कानून के महत्व को रेखांकित करता है। इससे पहले ट्रंप ने एक बार फिर इस पुरस्कार पर अपनी दावेदारी जताई। उन्होंने कहा था कि ये पुरस्कार उन्हें मिलना चाहिए। अगर नोबेल समिति उन्हें यह पुरस्कार नहीं देती है तो इससे नोबेल समिति की बहुत बदनामी होगी।
आठ साल से इस पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी जताते आ रहे हैं ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि मैं अपनी तारीफ नहीं कर रहा हूं, केवल तथ्य बता रहा हूं। मैंने आठ युद्ध रुकवाए और दुनिया को तबाह होने से रोका। शायद किसी भी राष्ट्रपति ने इतने युद्ध नहीं सुलझाए। वह आठ साल से इस पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी जताते आ रहे हैं।
PC: livehindustan
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