इंटरनेट डेस्क। देशभर में अभी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप पर लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कई पूर्व जज और संवैधानिक पदों पर रहे सेवानिवृत्त अधिकारी आयोग के समर्थन में आए हैं।
क्या कह रहे पूर्व जज
मीडिया रिपोटर्स की माने तो मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधानिकता को अपने तर्कों से पुष्ट करते हुए उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हमलों पर चिंता जताई। देशवासियों के नाम लिखे खुले पत्र में हर भारतीय से इन संस्थाओं के समर्थन व बचाव में आगे आने का आह्नान करते हुए उन्होंने चेताया कि वोट के विरुद्ध नैरेटिव से अशांति की शुरुआत होती है। फिर अराजक और चरमपंथी तत्व जगह ले लेते हैं। कुछ तो देश में ही होते हैं, कुछ को सीमापार से शह मिलती है। इसलिए लोकतंत्र में जनता का भरोसा बनाए रखने की जिम्मेदारी सबकी है।
संवैधानिक संस्थाओं पर हमला देश के लिए चिंताजनक
देश के 42 पूर्व जजों और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने पत्र में सबसे पहले स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक पार्टी से लेना-देना नहीं है। वे इसलिए लिख रहे हैं, क्योंकि अब चुप रहना कोई तटस्थ विकल्प नहीं है। भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हो रहे हमलों के केंद्र में चुनाव आयोग है। उच्च न्यायपालिका व कानूनी संस्थाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। लगता है कि यह राजनीतिक हितों से प्रेरित सोची-समझी मुहिम है, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अस्थिर करने के खतरनाक नतीजों की चिंता नहीं की गई है। संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन बदनाम करना नहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी अदालत ने इन आरोपों को सही नहीं पाया। वोट चोरी के आरोप प्रेस कान्फ्रेंस में लगाए जाते हैं और जब आयोग शपथ-पत्र मांगता है, तो कोई नहीं देता। जिस पार्टी ने पांच दशकों से ज्यादा देश पर राज किया, वही दावा करती है कि उसके बनाए सिस्टम में धांधली हुई है।
pc- nationalheraldindia.com







