Support Parmarth TV.  You can send any amount on our UPI Id: 9643218008m@pnb. 

PM Kisan Scheme: क्या पति-पत्नी को अलग-अलग मिलता है योजना का लाभ? ये है नियम | Parmarth TV Donald Trump ने बदल दिया है एआई का नाम, कर दिए हैं इस ऑर्डर पर साइन | Parmarth TV Congress: दिग्विजय सिंह की किस बात पर भड़की सोनिया गांधी, नीतीश कुमार को बता दिया गद्दार | Parmarth TV होम लोन की बढ़ सकती है ईएमआई, RBI जल्द ही करने वाला है बैठक | Parmarth TV INDIA ब्लॉक की आठवीं बैठक में लिए ये बड़े फैसले, खड़गे ने कहा- भाजपा चुनाव आयोग के साथ वोट चोरी कर रही है | Parmarth TV Gold-Silver Prices: फिर से बढ़ गए हैं सोने-चांदी के दाम, ये है आज की रेट | Parmarth TV मारा गया पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मोस्ट वांटेड आतंकवादी मूसा | Parmarth TV 1 October: नए महीने की पहली तारीख से बदलने जा रहे ये नियम, पड़ेगा आपकी जेब पर भी असर | Parmarth TV उज्जैन में शाही मस्जिद का एक हिस्सा तोड़े जाने पर हुआ हंगामा, पांच लोग गिरफ्तार | Parmarth TV Bank Holiday: जाने अक्टूबर महीने में कितनों दिनों के लिए रहेगी बैंकों में छुट्टियां, अटक सकते हैं आपके काम | Parmarth TV

आखिर लक्ष्मण से भी ज्यादा हनुमान जी को क्यों प्रिय मानते थे प्रभु श्री राम? पढ़ें यह भावुक प्रसंग

आखिर लक्ष्मण से भी ज्यादा हनुमान जी को क्यों प्रिय मानते थे प्रभु श्री राम? पढ़ें यह भावुक प्रसंग

धर्म डेस्क। सनातन धर्म में मंगलवार का दिन शक्ति, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस’ (Ramcharitmanas Prasang) के किष्किंधा कांड में एक ऐसा प्रसंग आता है, जो भगवान और भक्त के अटूट प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाता है। इस प्रसंग में श्री राम ने हनुमान जी को अपने छोटे भाई लक्ष्मण से भी दोगुना प्रिय बताया है।

ऋष्यमूक पर्वत पर हुई थी पहली भेंट

पौराणिक कथा के अनुसार, माता सीता की खोज में जब श्री राम और लक्ष्मण वन-वन भटक रहे थे, तब वे किष्किंधा के ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे। उन्हें देखकर वानरराज सुग्रीव भयभीत हो गए। उन्हें डर था कि कहीं ये बाली के भेजे हुए योद्धा न हों। सुग्रीव ने हनुमान जी को सच जानने के लिए ब्राह्मण के वेश में भेजा।

हनुमान जी ने ब्राह्मण बनकर दोनों राजकुमारों से उनका परिचय पूछा। जब श्री राम ने बताया कि वे अयोध्या नरेश दशरथ के पुत्र हैं और सीता जी की खोज में निकले हैं, तब हनुमान जी ने तुरंत अपना असली रूप प्रकट किया और प्रभु के चरणों में गिर पड़े।

‘मम प्रिय लछिमन ते दूना’ – जब भावुक हुए श्री राम

हनुमान जी अपनी भूल के लिए क्षमा मांगने लगे और उनकी आंखों से अश्रु बहने लगे। वे बोले, “हे भगवन! मैं तो मूर्ख हूं, लेकिन आप तो सर्वज्ञ हैं, फिर आपने मुझे क्यों नहीं पहचाना?” भक्त की यह व्याकुलता देखकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने उन्हें उठाकर गले से लगा लिया।

इसी दौरान श्री राम ने वह प्रसिद्ध चौपाई कही जो आज भी भक्तों के हृदय को छू जाती है-

‘सुनु कपि जियँ मानसि जनि ऊना। तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना॥ समदरसी मोहि कह सब कोऊ। सेवक प्रिय अनन्य गति सोऊ॥’

अर्थ: प्रभु ने कहा – ‘हे हनुमान! अपने मन में ग्लानि मत लाओ। तुम मुझे लक्ष्मण से भी दो गुने प्रिय हो। भले ही दुनिया मुझे ‘समदर्शी’ (सबको समान देखने वाला) कहती हो, लेकिन मुझे वह सेवक सबसे अधिक प्रिय है जो अनन्य भाव से केवल मेरे ही शरण में रहता है।’

क्यों थे हनुमान जी इतने प्रिय?

शास्त्रों के अनुसार, लक्ष्मण जी श्री राम के भाई और उनके साथ साये की तरह रहने वाले थे, लेकिन हनुमान जी ने स्वयं को एक ‘सेवक’ के रूप में पूर्णतः समर्पित कर दिया था। भगवान राम के अनुसार, जो भक्त अपना अहंकार त्यागकर पूरी तरह ईश्वर पर आश्रित हो जाता है, वह उनके लिए परिवार से भी बढ़कर हो जाता है। यही कारण है कि हनुमान जी को श्री राम ने अपने हृदय से लगाया और उन्हें ‘भरत सम भाई’ और ‘लक्ष्मण से दूना प्रिय’ कहा।

मंगलवार और हनुमान जी का संबंध

मान्यता है कि हनुमान जी की श्री राम से पहली मुलाकात मंगलवार के दिन ही हुई थी। इसीलिए इस दिन हनुमान जी के साथ-साथ श्री राम की पूजा का भी विशेष विधान है। ज्येष्ठ मास में आने वाले ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ के पीछे भी यही मान्यता है कि प्रभु और भक्त का यह मिलन इसी कालखंड में हुआ था।

Trending News