गुरु महाराज की यह विशेष साधना प्रतिदिन सुबह 11 से दोपहर 2:15 बजे तक चलेगी। पंच धूनी तपस्या के अंतर्गत महाराज पांच स्थानों पर प्रज्वलित धूनियों के मध्य …और पढ़ें
Publish Date: Thu, 21 May 2026 11:15:30 AM (IST)Updated Date: Thu, 21 May 2026 11:15:30 AM (IST)
HighLights
- 41 दिवसीय पंच धूनी एवं खड़ी तपस्या का शुभारंभ हुआ
- विशेष साधना प्रतिदिन सुबह 11 से दोपहर 2:15 बजे तक चलेगी
- महाराज पांच स्थानों पर प्रज्वलित धूनियों के मध्य बैठकर ध्यान एवं साधना करेंगे
नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास। सद्गुरु योगेंद्र शीलनाथ महाराज धूनी परिसर, मल्हार क्षेत्र में बुधवार से 41 दिवसीय पंच धूनी एवं खड़ी तपस्या का शुभारंभ हुआ।
शीलनाथ भक्त मंडल के सचिव राहुल शर्मा ने बताया कि हरियाणा के हिसार जिले के सुल्तानपुर गांव स्थित नाथ संप्रदाय के प्राचीन मठ के गादीपति महंत बालयोगी संतोष नाथ महाराज ने 20 मई को प्रातः 11 बजे तपस्या आरंभ की। तपस्या का बुधवार को प्रथम दिन रहा।
बताया कि गुरु महाराज की यह विशेष साधना प्रतिदिन सुबह 11 से दोपहर 2:15 बजे तक चलेगी। पंच धूनी तपस्या के अंतर्गत महाराज पांच स्थानों पर प्रज्वलित धूनियों के मध्य बैठकर ध्यान एवं साधना करेंगे। पहले दिन पर गुरु महाराज ने 28-28 कंडों की धूनी के बीच साधना प्रारंभ की।
29 जून तक चलेगी तपस्या
यह तपस्या आगामी 29 जून तक निरंतर चलेगी। नाथ संप्रदाय में पंच धूनी तपस्या को अत्यंत दुर्लभ एवं कठोर साधना माना जाता है। भीषण गर्मी और धधकती अग्नि के मध्य घंटों तक ध्यान लगाना तथा खड़े रहकर साधना करना सामान्य साधकों के लिए अत्यंत कठिन माना जाता है। तपस्या के शुभारंभ पर शीलनाथ भक्त मंडल के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
प्रभु भक्ति, साधु-संतों की सेवा से मानव जीवन बनता है सरल
हाटपीपल्या : भागवत कथा सबके जीवन को मंगलमय बनाती है। जो भगवान की कथा श्रवण करता है, भगवान की भक्ति करता है, साधु-महात्माओं की सेवा करता है तो उसका जीवन सरल और सहज बनता है और उसके ऊपर भगवान की कृपा रहती है। भागवत कथा हमारे जीवन और मृत्यु को मंगलमय बनाती है और राम कथा हमको जीवन जीना सिखाती है क्योंकि प्रभु राम का जीवन मर्यादित रहा और वह मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कहलाए।
यह विचार नृसिंह मंदिर में चल रही भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा वाचक पं. योगेश शर्मा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा जब-जब धरा पर अत्याचार बढ़ते हैं तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। मथुरा के राजा कंस ने उनकी बहन देवकी के साथ अत्याचार किया था, उनकी छह संतानों को मार दिया था तब जाकर भगवान ने अवतार लिया था। कथा में श्री कृष्ण जन्म महोत्सव उल्लास के साथ मनाया गया।







