साल 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा। जानिए पूर्णिमा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक श्राद्ध की सभी तिथियों की पूरी सूची और धार्मिक महत…और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sun, 30 Aug 2026 07:03:34 PM (IST)Updated Date: Sun, 30 Aug 2026 07:03:34 PM (IST)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन परंपरा में पितृपक्ष का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनके निमित्त श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि पितृपक्ष में किए गए इन धार्मिक कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष का आरंभ होता है, जो आश्विन माह की अमावस्या तिथि (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलता है। साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत सितंबर महीने के अंत में हो रही है और यह अक्टूबर तक चलेगा।
कब से शुरू हो रहा है पितृपक्ष 2026?
साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर (शनिवार) से होने जा रही है। 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाएगा। इसके बाद 27 सितंबर को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध होगा। इस बार पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।
पितृपक्ष 2026 की प्रमुख तिथियों की पूरी सूची
- 26 सितंबर (शनिवार): भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध
- 27 सितंबर (रविवार): प्रतिपदा श्राद्ध
- 28 सितंबर (सोमवार): द्वितीया श्राद्ध
- 29 सितंबर (मंगलवार): तृतीया श्राद्ध
- 30 सितंबर (बुधवार): चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध (दोनों तिथियां एक ही दिन)
- 1 अक्टूबर (गुरुवार): षष्ठी श्राद्ध
- 2 अक्टूबर (शुक्रवार): सप्तमी श्राद्ध
- 3 अक्टूबर (शनिवार): अष्टमी श्राद्ध
- 4 अक्टूबर (रविवार): नवमी श्राद्ध (मातृ नवमी)
- 5 अक्टूबर (सोमवार): दशमी श्राद्ध
- 6 अक्टूबर (मंगलवार): एकादशी श्राद्ध
- 7 अक्टूबर (बुधवार): द्वादशी श्राद्ध
- 8 अक्टूबर (गुरुवार): त्रयोदशी श्राद्ध
- 9 अक्टूबर (शुक्रवार): चतुर्दशी श्राद्ध
- 10 अक्टूबर (शनिवार): अमावस्या (सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या श्राद्ध)
किस दिन करना चाहिए पितरों का श्राद्ध?
शास्त्रों और हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, परिवार के जिस सदस्य या पूर्वज का निधन जिस तिथि को हुआ होता है, पितृपक्ष में उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाना शास्त्रसम्मत माना जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी की मृत्यु प्रतिपदा तिथि को हुई है तो उनका श्राद्ध प्रतिपदा के दिन ही होगा।
- मातृ नवमी का महत्व: माताओं और परिवार की दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध करने के लिए नवमी तिथि (4 अक्टूबर) को सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए इसे ‘मातृ नवमी’ भी कहा जाता है।
- अज्ञात तिथि के लिए सर्वपितृ अमावस्या: जिन पूर्वजों या परिजनों की मृत्यु की सटीक तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या (10 अक्टूबर) के दिन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया श्राद्ध सभी पितरों तक पहुंचता है।
- तिथियों का विशेष ध्यान: साल 2026 के कैलेंडर के अनुसार, चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन 30 सितंबर (बुधवार) को पड़ रहा है। ऐसे में जिन पूर्वजों का निधन चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुआ था, उनका श्राद्ध 30 सितंबर को ही किया जाएगा।
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