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राजा परीक्षित ने कलयुग को रहने के लिए दिए पांच स्थान फिर शुरू हुआ द्वापर का अंत और कलयुग का आगमन

राजा परीक्षित ने कलयुग को रहने के लिए दिए पांच स्थान फिर शुरू हुआ द्वापर का अंत और कलयुग का आगमन

महाभारत के महायुद्ध और भीष्म के चले जाने के बाद जब श्री कृष्ण द्वारका के लिए प्रस्थान कर गए तब अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसक …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 05 Apr 2026 02:52:18 PM (IST)Updated Date: Sun, 05 Apr 2026 02:54:09 PM (IST)

HighLights

  1. अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने एक पुत्र को जन्म दिया
  2. परीक्षित की कहानी गहरे सबकों से भरी है
  3. परीक्षित को हस्तिनापुर का राज्य सौंपा गया

मनोज दुबे। महाभारत के महायुद्ध और भीष्म के चले जाने के बाद जब श्री कृष्ण द्वारका के लिए प्रस्थान कर गए तब अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम परीक्षित रखा गया। परीक्षित की कहानी गहरे सबकों से भरी है।

राजा परीक्षित के जीवन का सफर, उनके जन्म से लेकर उनकी मृत्यु का कारण बनने वाली परिस्थितियां सब धर्मपरायण राजधर्म, आध्यात्मिकता और एक युग से दूसरे युग में होने वाले अनिवार्य परिवर्तन के विषयों को समेटे हुए है।

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महाभारत युद्ध के पश्चात उत्तरा के गर्भ से हुआ था

भागवताचार्य पवन तिवारी के अनुसार परीक्षित का जन्म महाभारत युद्ध के पश्चात उत्तरा के गर्भ से हुआ था। अश्वत्थामा द्वारा छोड़े गए ब्रह्मास्त्र से भगवान श्रीकृष्ण ने गर्भ में ही उनकी रक्षा की थी। पांडवों के स्वर्गारोहण के पूर्व परीक्षित को हस्तिनापुर का राज्य सौंपा गया।

द्वापर युग का अंत और कलयुग का आगमन हुआ

उनके शासनकाल में ही द्वापर युग का अंत और कलयुग का आगमन हुआ। कथा के अनुसार, राजा परीक्षित ने कलयुग को रहने के लिए पांच स्थान दिए, जिनमें मदिरालय, वेश्यालय, जुआ घर, वधशाला और अधर्म से अर्जित स्वर्ण शामिल हैं।

आखिर राजा परीक्षित को क्यों मिला श्राप

प्यास से व्याकुल राजा ने ध्यानमग्न शमिक ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया था। इस कृत्य के कारण श्रृंगी ऋषि ने उन्हें सात दिनों के भीतर तक्षक नाग के डसने का श्राप दिया। यही श्राप आगे चलकर उनकी मृत्यु और कलयुग के पूर्ण प्रभाव का कारण बना।

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