ऐसा माना जाता है कि इस समय भगवान शिव धरती पर मौजूद रहते हैं। इस माह में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करना बेहद शुभफलदायी माना गया है। सावन माह को भक्ति, व्रत और पुण्य का प्रतीक माना जाता है।
By Jogendra Sen
Publish Date: Sat, 12 Jul 2025 07:18:03 PM (IST)
Updated Date: Sat, 12 Jul 2025 07:25:14 PM (IST)
HighLights
- शिव भक्त उपवास रखते हैं।
- शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं।
- वे विशेष पूजा-पाठ करते हैं।
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। पहला सोमवार श्रावण मास के चौथे दिन 14 जुलाई को पड़ेगा। पहले सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि प्रीति योग बनेगा। यह योग शुभ कार्यों और पूजा के लिए एक शुभ माना जाता है। नगर के प्रमुख शिव मंदिरों व शिवालयों में पहले सोमवार की तैयारियां शुरू हो गईं हैं।
अचलेश्वर मंदिर पर भगवान अचलनाथ का जल अभिषेक के लिए 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मंदिर संचालन समिति ने जिलाधीश व एसएसपी को पत्र लिखकर श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मदद मांगी है। सोमवार को सुबह पांच बजे से रात 12 बजे तक कोई विशेष अभिषेक नही होगा।
मंदिर के तीनों मार्गों पर श्रद्धालुओं के प्रवेश व निकलने के लिए बेरीकेड्स लगाए जा रहे हैं। नगर के प्राचीन कोटेश्वर शिवालय व गुप्तेश्वर मंदिर में भी सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। शिव मंदिरों में आकर्षक विद्युत सजावट की गई है। मंदिर रंग-बिरंगी रोशनी में जगमगा रहे हैं। इस वर्ष सावन माह में चार सोमवार पड़ेंगे।
तीन मार्गों से श्रद्धालुओं का प्रवेश व निकासी होगी
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अचलेश्वर मंदिर के प्रबंधक राजेश पाराशर व लेखाधिकारी वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि पहले सोमवार को श्रद्धालुओं को देवाधिदेव महादेव के दर्शनों के लिए भारी भीड़ उमड़ेगी।
कोटेश्वर व गुप्तेश्वर मंदिर सुरक्षा के इंतजाम
सावन अति पुण्यदायिनी मास







