दो अप्रैल को हनुमान जी का प्राकट्योत्सव श्रद्धा भक्ति व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह एक ऐसा मंदिर है, जो संस्कारधानी में आस्था का केंद्र बना हुआ है। …और पढ़ें
Publish Date: Wed, 01 Apr 2026 11:58:01 AM (IST)Updated Date: Wed, 01 Apr 2026 12:00:18 PM (IST)
HighLights
- शनिदेव को उनके पिता के पास ले गए
- शनिदेव के पास पहुंचे तो उनकी छाया पड़ी
- प्रसन्न होकर शनिदेव ने वरदान दिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। दो अप्रैल को हनुमान जी का प्राकट्योत्सव श्रद्धा भक्ति व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह एक ऐसा मंदिर है, जो संस्कारधानी में आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां हनुमान जी के जन्म उत्सव पर भजन एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
धर्म ग्रंथो के अनुसार हनुमान जी द्वारा सूर्य देव से शिक्षा ग्रहण की गई थी। शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत जब हनुमान जी द्वारा सूर्य देव से गुरु दक्षिणा की बात कही गई तो उन्होंने हनुमान जी से अपने रूठे हुए पुत्र शनि को मनाकर उनके पास लाने की बात कही।
शनिदेव के पास पहुंचे तो उनकी छाया पड़ी
गुरु की आज्ञा पूर्ण करने के लिए हनुमान जी महाराज शनिदेव की खोज में लग गए और खोज के उपरांत जब शनिदेव के पास पहुंचे तो उनकी छाया पड़ने से हनुमान जी का शरीर काला पड़ गया। लेकिन वह शनिदेव को मनाने में सफल रहे और उन्हें उनके पिता सूर्य देव के पास ले गए।

प्रसन्न होकर शनिदेव ने वरदान दिया
हनुमान जी की गुरु भक्ति से प्रसन्न होकर शनिदेव ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति उनके इस काले रूप का दर्शन करेगा व तिल का तेल अर्पित करेगा तो शनि देव प्रसन्न हो जाएंगे और व्यक्ति के ऊपर शनि देव की कुदृष्टि नहीं पड़ेगी, जिसके चलते पाटन बायपास में एक टाउनशिप स्थित चिंतामणि हनुमान मंदिर में भक्तों की आस्था दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।







