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17 मई से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास, इस साल 13 महीने का होगा हिंदू कैलेंडर, पढ़ें क्यों वर्जित रहेंगे मांगलिक कार्य

17 मई से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास, इस साल 13 महीने का होगा हिंदू कैलेंडर, पढ़ें क्यों वर्जित रहेंगे मांगलिक कार्य

हिंदू कैलेंडर में यह वर्ष 13 माह का है। इस वर्ष अधिक मास जिसे पुरुषोत्तम मास या मल मास भी कहते हैं, 17 मई रविवार से शुरू होकर 15 जून, सोमवार तक रहेगा। …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 11 May 2026 06:54:17 PM (IST)Updated Date: Mon, 11 May 2026 06:54:17 PM (IST)

3 साल बाद आया ‘अधिक मास’।

HighLights

  1. ज्येष्ठ के होंगे दो महीने, 3 साल बाद आया ‘अधिक मास’
  2. ज्योतिषाचार्य से जानें दान-पुण्य और पूजा का विशेष महत्व
  3. सौर और चंद्र वर्ष के 11 दिनों के अंतर को ऐसे करता है दूर

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। हिंदू कैलेंडर में यह वर्ष 13 माह का है। इस वर्ष अधिक मास जिसे पुरुषोत्तम मास या मल मास भी कहते हैं, 17 मई रविवार से शुरू होकर 15 जून, सोमवार तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि मलमास इस वर्ष ज्येष्ठ माह में आ रहा है, इसलिए ज्येष्ठ का महीना दो बार यानी दो महीने का होगा। यह अतिरिक्त महीना तीन साल में एक बार आता है और पूजा-पाठ, दान व ध्यान के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

क्या होता है मलमास और क्यों वर्जित हैं मंगल कार्य?

जिस चंद्र महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती, उसे अधिकमास, पुरुषोत्तम मास या मलमास कहते हैं। सूर्य का संक्रमण नहीं होने से ही अधिमास में विवाह और मंगल कार्य वर्जित माने गए हैं। जिस मास में भगवान सूर्य का किसी राशि पर भी संक्रमण नहीं होता, वह अधिमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहलाता है। एक ही मास में संक्रांतिद्वय होने पर वह मास क्षय मास कहलाता है।

अधिक मास का वैज्ञानिक कारण और गणना

अधिक मास (जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं) का मुख्य वैज्ञानिक कारण सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच का अंतर है। सौर वर्ष में पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में लगभग 365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनट और 46 सेकंड लगते हैं। वहीं, चंद्र वर्ष में चंद्रमा के 12 चक्करों से बने वर्ष में 354 दिन होते हैं। इन दोनों वर्षों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर (365 – 354 = 11) रह जाता है।

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ऋतुओं और त्योहारों का संतुलन

यह 11 दिनों का अंतर हर साल जुड़ते-जुड़ते, लगभग 3 साल में 33 दिनों (32-33 दिन) का एक अतिरिक्त महीना बना देता है। इसलिए वैज्ञानिक समायोजन किया जाता है। यदि यह अतिरिक्त मास न जोड़ा जाए, तो हर साल त्योहार 11 दिन पहले आ जाएंगे और 3-4 साल में त्योहारों का मौसम पूरी तरह बदल जाएगा (जैसे दिवाली गर्मियों में आ सकती है)। पंचांग के इस अंतर को दूर करने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, ताकि वर्ष और ऋतुओं का संतुलन बना रहे।

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