Indira Ekadashi 2025 Date: इंदिरा एकादशी व्रत 17 सितंबर 2025 को रखा जाएगा। यह व्रत पितृ पक्ष में आने के कारण विशेष महत्व रखता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ पितरों का तर्पण करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा के साथ पितरों का तर्पण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
Publish Date: Mon, 08 Sep 2025 10:08:17 AM (IST)
Updated Date: Mon, 08 Sep 2025 10:53:00 AM (IST)
HighLights
- इंदिरा एकादशी 17 सितंबर को मनाई जाएगी
- पितृ पक्ष में तर्पण से मिलेगी पापों से मुक्ति
- शुभ योग में भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा
धर्म डेस्क: इंदिरा एकादशी व्रत का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि (Indira Ekadashi 2025 Date) को किया जाता है। 2025 में यह व्रत 17 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन मंगलकारी शिव योग और परिघ योग जैसे कई शुभ योग बन रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से साधक को अक्षय और अमोघ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही हर मनोकामना पूरी होती है।
पुण्य, मोक्ष और पापों से मुक्ति का दिन
इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आती है। पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इस पक्ष को पितरों को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है। इंदिरा एकादशी के दिन व्रत और तर्पण करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति द्वारा जीवन में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। व्रती को मृत्यु उपरांत उच्च लोक की प्राप्ति होती है। श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को तृप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मुहूर्त और तिथि (Indira Ekadashi Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 16 सितंबर की रात 12 बजकर 21 मिनट से होगी और यह तिथि 17 सितंबर की रात 11 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्य उदय से तिथि की गणना होने के कारण इंदिरा एकादशी का व्रत 17 सितंबर को ही रखा जाएगा।
पारण समय (Indira Ekadashi Paran Timing)
व्रत का पारण 18 सितंबर को किया जाएगा। इस दिन सुबह 06 बजकर 07 मिनट से 08 बजकर 34 मिनट के बीच स्नान-ध्यान और पूजा-पाठ के बाद व्रत खोला जा सकता है। व्रत तोड़ने से पहले अन्न और धन का दान करना शुभ माना गया है।
पंचांग विवरण
- सूर्योदय: सुबह 06:07 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:24 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:33 से 05:20 बजे तक
- विजय मुहूर्त: 02:18 से 03:07 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: 06:24 से 06:47 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:52 से 12:39 बजे तक
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