Pitru Paksha 2025: इस साल पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरु होकर 21 सितंबर तक चलने वाले हैं। माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को पितृ दोष लग जाए, तो उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।
Publish Date: Wed, 03 Sep 2025 05:13:39 PM (IST)
Updated Date: Wed, 03 Sep 2025 05:13:39 PM (IST)
HighLights
- पितृ पक्ष शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी
- 7 से 21 सितंबर तक चलने वाला है पितृ पक्ष
- सात पीढ़ियों तक रह सकता है पितृ दोष का प्रभाव
धर्म डेस्क। हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष विशेष महत्व रखता है, जिसे पूर्वजों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। पितृ पक्ष शुरू होने में अब बस कुछ दिन बाकी हैं। इस साल पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरु होकर 21 सितंबर तक चलने वाले हैं। माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को पितृ दोष लग जाए, तो उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बड़ी बात यह है कि यह दोष या पितृ ऋण केवल उसी पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इसका सामना करना पड़ता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।
इतनी पीढ़ियों तक झेलना पड़ता है ऋण
ऐसा माना गया है कि पितृ ऋण या पितृदोष का प्रभाव सात पीढ़ियों तक रह सकता है। शास्त्रों में बताया गया है कि उन लोगों को पितरों की नाराजगी का सामना करना पड़ता है, जिनके घर में मांस-मदिरा का सेवन किया जाता है। इसके अलावा जो पितरों का अपमान करता है, उसे भी पितृ दोष का सामना करना पड़ सकता है। माना जाता है कि पितृ दोष लगने की सूरत में परिवार में लड़ाई-झगड़े क माहौल बना रहता है, साथ ही पीड़ित लोगों को संतान प्राप्ति में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा विवाह में देरी, आर्थिक नुकसान, करियर व कारोबार में रुकावट जैसी दिक्कतें भी आती हैं।
पितृ दोष में कर सकते हैं ये उपाय
पितृ दोष लगने की सूरत में पितृ पक्ष में विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य जरूर करना चाहिए। इसके साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा देकर उन्हें विदा करें, ताकि पितरों की कृपा हासिल हो सके। माना जाता है कि पितृ दोष लगने पर पंचबलि अर्थात गाय, कुत्ते, कौवे, देव और चींटी के लिए भी भोजन निकालना चाहिए।
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अस्वीकरण- इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।







