Ramadan 2026: इस्लाम में खजूर से रोजा खोलना ‘सुन्नत’ माना जाता है। पैगंबर हजरत मोहम्मद हमेशा खजूर से अपना रोजा इफ्तार करते थे। इसके पीछे धार्मिक आस्था …और पढ़ें
Publish Date: Thu, 19 Feb 2026 05:05:55 PM (IST)Updated Date: Thu, 19 Feb 2026 05:05:55 PM (IST)
HighLights
- रमजान में खजूर से ही रोजा खोलने का रिवाज है
- इस्लाम में खजूर से रोजा खोलना ‘सुन्नत’ माना जाता है
- खजूर से रोजा खोलना हेल्थ के लिए सबसे बेहतर विकल्प
धर्म डेस्क। रमजान का महीना इबादत, आत्म-संयम और पाकीजगी का प्रतीक है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग सहरी से इफ्तार तक अन्न-जल का त्याग कर खुदा की राह में मशगूल रहते हैं। शाम को जब इफ्तार का वक्त होता है, तो दस्तरख्वान पर सबसे प्रमुख स्थान ‘खजूर’ को दिया जाता है। आखिर खजूर से ही रोजा खोलने की यह परंपरा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ विज्ञान के भी गहरे तर्क छिपे हैं।
इस्लाम में खजूर से रोजा खोलना ‘सुन्नत’ माना जाता है। पैगंबर हजरत मोहम्मद (PBUH) हमेशा खजूर से अपना रोजा इफ्तार करते थे। उन्होंने खजूर को एक ‘मुबारक’ (Blessed) फल बताया है। मान्यता है कि खजूर से रोजा खोलने से इबादत में बरकत होती है। यदि खजूर उपलब्ध न हो, तो पानी से रोजा खोलने की सलाह दी जाती है, क्योंकि पानी शुद्धता का प्रतीक है।
क्या कहता है विज्ञान?
दिन भर के उपवास के बाद शरीर का एनर्जी लेवल काफी कम हो जाता है। विज्ञान के अनुसार, खजूर से रोजा खोलना स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर विकल्प है। खजूर में ग्लूकोज, सुक्रोज और फ्रुक्टोज जैसी प्राकृतिक मिठास प्रचुर मात्रा में होती है, जो ब्लड शुगर लेवल को तुरंत सामान्य कर शरीर को एनर्जी प्रदान करती है। खजूर फाइबर का बेहतरीन स्रोत है।
खाली पेट अचानक भारी भोजन करने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। खजूर पेट को भोजन के लिए सक्रिय करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है। इसमें मौजूद पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने और दिन भर की कमजोरी को दूर करने में सहायक होते हैं।
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