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Shiv Temple in MP: महाकाल महालोक की तर्ज पर भोपाल के करीब बना मानसरोवर धाम, श्रावण में दर्शन को पहुंचते हैं भक्त

Shiv Temple in MP: महाकाल महालोक की तर्ज पर भोपाल के करीब बना मानसरोवर धाम, श्रावण में दर्शन को पहुंचते हैं भक्त

Mansarovar Temple Fanda Sehore: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पास फंदा गांव में मानसरोवर धाम का निर्माण हुआ है, जो उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर बना है। यहां भगवान शिव की 51 फीट ऊंची प्रतिमा और द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं। श्रावण माह में बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।

By Prashant Pandey

Publish Date: Sat, 19 Jul 2025 01:03:15 PM (IST)

Updated Date: Sat, 19 Jul 2025 01:08:32 PM (IST)

ग्राम फंदा के अंतिम छोर पर विकसित शिवलोक में स्थापित शिवजी की पाषाण प्रतिमा के दर्शन करने पहुंचते हैं श्रद्धालु।

HighLights

  1. भोपाल से करीब 25 किमी दूर सीहोर के फंदा गांव में बना है यह धाम।
  2. द्वादश ज्योतिर्लिंग के एक साथ दर्शन, सप्तऋषियों के भी होते हैं दर्शन।
  3. धाम में प्रतिदिन होते हैं धार्मिक अनुष्ठान, रुद्राभिषेक और अभिषेक।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल (Sawan 2025)। उज्जैन के महाकाल लोक की तरह भोपाल की सीमा में भी महा शिवलोक धाम के रूप में भव्य आध्यात्मिक स्थल ने आकार लिया है। यहां आकर आपको भगवान शिव और विशालकाय नंदी बाबा के साथ द्वादश ज्योर्तिलिंग के दर्शन भी होते हैं। श्रावण माह में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं। भोपाल करीब 20 से 25 किलोमीटर दूर ग्राम फंदा के अंतिम छोर पर हाल ही में विकसित हुआ मानसरोवर धाम धीरे-धीरे आस्था का केंद्र बन रहा है। बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं।

यहां कैलाश मानसरोवर की तर्ज पर शिवलोक आकार ले चुका है। भविष्य में श्रद्धालुओं को विष्णु लोक एवं गौ लोक के दर्शन भी हो सकेंगे। शिवलोक में करीब 51 फीट की भगवान शिव की पाषाण प्रतिमा स्थापित है। दूर से ही शिवजी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते नजर आते हैं। कैलाश पर्वत पर विराजमान शिवजी की प्रतिमा बेहद आकर्षक है। इसका वजन करीब 150 टन है। उड़ीसा के कारीगरों ने इसका निर्माण किया है।

साथ में भव्य हजारी महादेव शिवलिंग स्थापित है, साथ ही 1108 छोटे शिवलिंग स्थापित किए गए हैं। इनका निर्माण एक ही पत्थर से किया है। पिछले दिनों इसकी प्राण प्रतिष्ठा विधि-विधान के साथ की गई थी। यह बाहर से पहाड़ की तरह नजर आता है। अंदर का आकार गुफा की तरह है। मंदिर की स्थापना धार्मिक प्रवृति के कारोबारी संजय कश्यप के प्रयास एवं प्रेरणा से की गई है।

सबसे पहले विशालकाय नंदी के दर्शन

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शिवलोक में प्रवेश करने के लिए श्रद्धालुओं को नंदी गेट से गुजरना पड़ता है। गेट के ऊपर विशालकाय नंदी महाराज की प्रतिकृति स्थापित है। इसके साथ ही नागकन्या का जल नंदी के चरणों में नहर के रूप में स्थापित किया गया है। श्रद्धालु जल से चरण धोने के बाद ही अंदर प्रवेश कर सकते हैं। नंदी के आसपास डमरू एवं शंख गेट भी विकसित किया गया है।

एक साथ होते हैं द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन

माना जाता है कि शिवजी जहां-जहां प्रकट हुए थे वहां शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। इनकी संख्या 12 है। इन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। इनके एक साथ दर्शन करना बेहद शुभ माना जाता है।

शिवलोक में इनके एक साथ दर्शन किए जा सकते हैं। इसके अलावा यहां सप्तऋषियों के दर्शन भी किए जा सकते हैं। सिद्धिविनायक गणेशजी के दर्शन करने के बाद आप गुरु वशिष्ठ, विश्वामित्र एवं अरुंधति सहित सप्तऋषियों के दर्शन कर सकते हैं। अवकाश के दिन घर से बाहर आध्यात्मिक स्थल पसंद करने वाले लोगों के लिए यह अच्छा धार्मिक स्थल बन रहा है।

श्रावण महीने में आते हैं भक्त

यहां भगवान शिव की प्रतिमा देखकर सुखद अहसास होता है। नंदी बाबा दूर से ही दर्शन देते हैं। भोपाल के निकट ऐसा स्थान होना अच्छी बात है। श्रावण माह में शिव दर्शन करने बहुत लोग यहां आते हैं। – जितेंद्र शिवनानी, श्रद्धालु

बच्चों को मिलती है धार्मिक संस्कृति की जानकारी

शिवलोक के दर्शन करने लोग बच्चों के साथ यहां आते हैं। यहां आकर बच्चों को अपनी धार्मिक संस्कृति और देवी, देवताओं के बारे में जानकारी मिलती है। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से यह अच्छा स्थान है। – राजू वर्मा, श्रद्धालु

प्रतिदिन होते हैं धार्मिक अनुष्ठान

शिवलोक धार्मिक आस्था का केंद्र बना चुका है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन लाभ लेने आ रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठान, दुर्गा सप्त शति पाठ एवं अभिषेक प्रतिदिन होते हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग भगवान हजारी महादेव का रुद्राभिषेक, सहस्त्रधारा अभिषेक प्रतिदिन होता है। – पं. सोनू व्यास शिवलोक धाम

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