धरातल से लगभग 1000 फीट की ऊंचाई पर विराजित मां विजयासन के दरबार में नवरात्र के पावन पर्व पर मध्य प्रदेश सहित देशभर से लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं …और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 04:14:24 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 04:38:53 PM (IST)
HighLights
- 1000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान हैं मां विजयासन धाम।
- सलकनपुर धाम में नवरात्र पर उमड़ रहा है आस्था का सैलाब।
- 1400 सीढ़ियों के अलावा रोप-वे और पक्की सड़क यात्रा सुगम।
सीहोर/सलकनपुर। जिले की रेहटी तहसील अंतर्गत विंध्याचल की सुरम्य पर्वत श्रृंखलाओं पर स्थित मां विजयासन देवी का चमत्कारी धाम इन दिनों श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा हुआ है। धरातल से लगभग 1000 फीट की ऊंचाई पर विराजित मां विजयासन के दरबार में नवरात्र के पावन पर्व पर मध्य प्रदेश सहित देशभर से लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंच रहे हैं।

रक्तबीज के वध के बाद देवी को मिला था विशेष आसन
धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं को असुर रक्तबीज के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए माता पार्वती ने विकराल रूप धारण किया था। मान्यता है कि इसी पावन पहाड़ी पर देवी ने रक्तबीज का संहार किया था। असुर पर विजय प्राप्त करने के बाद देवताओं ने माता को एक भव्य व विशेष आसन समर्पित किया था, जिसके बाद से यह तीर्थ स्थल ‘विजयासन धाम’ के नाम से विख्यात हुआ। मां विजयासन को समस्त कष्टों को हरने वाली देवी माना जाता है और मालवा-निमाड़ सहित समूचे मध्य भारत में लाखों भक्त इन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।
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बंजारों के चमत्कार और आस्था से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
मंदिर के ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर करीब 300 वर्ष पुरानी एक रोचक गाथा प्रचलित है। बताया जाता है कि यहां से गुजर रहे बंजारों के पशु अचानक गायब हो गए थे। काफी तलाश के बाद एक वृद्ध बंजारे को पर्वत पर एक दिव्य कन्या के दर्शन हुए। उस कन्या ने पत्थर फेंककर पहाड़ी की ओर संकेत किया और वहां पूजा-अर्चना करने का आदेश दिया। जैसे ही बंजारों ने वहां पहुंचकर आराधना की, उनके खोए हुए मवेशी सकुशल मिल गए। इस दैवीय चमत्कार से अभिभूत होकर बंजारों ने इस पहाड़ी पर मंदिर का निर्माण कराया था।
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सुगम हुआ सफर: 1400 सीढ़ियां, रोप-वे और पक्की सड़क की सुविधा
श्रद्धालुओं को पहाड़ी पर स्थित माता के मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 1400 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हालांकि, जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट द्वारा अब पहाड़ी के शीर्ष तक पक्की सड़क का निर्माण करा दिया गया है, जिससे चार पहिया व दो पहिया वाहन सीधे ऊपर पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए आधुनिक रोप-वे (उड़नखटोला) की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे चंद मिनटों में मंदिर परिसर तक पहुंचा जा सकता है।







