इसके लिए बैंक के सुरक्षित लॉकर में रखे सोने-चांदी के आभूषण, भगवान के बर्तन और सजावट का सामान पुलिस सुरक्षा के बीच मंदिर लाया जाएगा। आभूषणों की सफाई के…और पढ़ें
Publish Date: Thu, 03 Sep 2026 10:01:12 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 10:04:11 PM (IST)
HighLights
- साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पूरी।
- एलईडी के जरिए कर सकेंगे दर्शन।
- कतार में लगे श्रद्धालुओं को सुविधा।
धर्म डेस्क। फूलबाग स्थित ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव 4 सितंबर शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। जन्माष्टमी पर भगवान राधा-कृष्ण का 100 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के बेशकीमती राजसी आभूषणों से श्रृंगार किया जाएगा।
इसके लिए बैंक के सुरक्षित लॉकर में रखे सोने-चांदी के आभूषण, भगवान के बर्तन और सजावट का सामान पुलिस सुरक्षा के बीच मंदिर लाया जाएगा। आभूषणों की सफाई के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
जन्माष्टमी की तैयारियों को लेकर नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने गोपाल मंदिर का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
मंदिर परिसर में साफ-सफाई व्यवस्था पूरी कर ली गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा और परिसर को स्वच्छ रखने के लिए जगह-जगह डस्टबिन भी रखवाए गए हैं।
1921 में हुआ था मंदिर का निर्माण
गोपाल मंदिर का इतिहास ग्वालियर रियासत के राजसी वैभव और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है। मंदिर की स्थापना वर्ष 1921 में तत्कालीन ग्वालियर रियासत के शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने कराई थी। उन्होंने भगवान के श्रृंगार और पूजा के लिए सोने के आभूषण तथा चांदी के बर्तन बनवाए थे। इन आभूषणों में कई बहुमूल्य रत्न जड़े हैं, जो उस समय की शिल्पकला और राजसी परंपरा की झलक दिखाते हैं।
55 पन्नों वाले हार से होगा श्रृंगार
जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण के श्रृंगार में पन्ना जड़ित सात लड़ी का हार विशेष आकर्षण रहेगा। बताया जाता है कि इस हार में 55 पन्ने जड़े हैं। इसके अलावा हीरे और माणिक जड़ित सोने की बांसुरी, सोने की नथ, जंजीर सहित अन्य आभूषण भी भगवान के श्रृंगार में शामिल किए जाएंगे। इन आभूषणों में हीरा, पन्ना, माणिक, नीलम और पुखराज जैसे रत्न जड़े हुए हैं।
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2007 से हो रहा विशेष श्रृंगार
आजादी के बाद इन ऐतिहासिक आभूषणों को सुरक्षा की दृष्टि से बैंक के लॉकर में रख दिया गया था। वर्ष 2007 से हर साल जन्माष्टमी पर इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर लाकर भगवान का श्रृंगार किया जाता है। दर्शन के बाद आभूषणों को फिर सुरक्षित लॉकर में रख दिया जाता है। इस तरह इस वर्ष यह विशेष श्रृंगार 19वीं बार किया जाएगा।

एलईडी पर भी होंगे दर्शन
जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए नगर निगम ने विशेष व्यवस्था की है। मंदिर के बाहर दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालुओं को भी भगवान के बेशकीमती आभूषणों से सजे स्वरूप के दर्शन हो सकें, इसके लिए परिसर में एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं। सुरक्षा, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं।








