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दुनिया का अनोखा मंदिर… जहां नारी रूप में पूजे जाते हैं बजरंग बली, छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित है यह अनोखा धाम

दुनिया का अनोखा मंदिर… जहां नारी रूप में पूजे जाते हैं बजरंग बली, छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित है यह अनोखा धाम

क्या आप जानते हैं कि भारत की पावन भूमि पर एक ऐसा अनोखा और विस्मयकारी मंदिर भी है, जहां हनुमान जी किसी पुरुष रूप में नहीं, बल्कि एक नारी (स्त्री) के स् …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 22 May 2026 05:26:08 PM (IST)Updated Date: Fri, 22 May 2026 05:26:08 PM (IST)

वो रहस्यमयी मंदिर जहां हनुमान जी बने देवी।

HighLights

  1. वो रहस्यमयी मंदिर जहां हनुमान जी बने देवी
  2. छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित है अनोखा धाम
  3. जानें इस चमत्कारी मंदिर की पौराणिक गाथा

धर्म डेस्क। पवनपुत्र हनुमान जी को पूरे ब्रह्मांड में अदम्य साहस, अपार शक्ति और अखंड ‘बाल ब्रह्मचारी’ के रूप में जाना जाता है। देश-दुनिया में बजरंग बली के जितने भी सिद्ध पीठ या मंदिर हैं, वहां उनकी पूजा एक बलशाली पुरुष और प्रभु श्रीराम के अनन्य दास के रूप में होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की पावन भूमि पर एक ऐसा अनोखा और विस्मयकारी मंदिर भी है, जहां हनुमान जी किसी पुरुष रूप में नहीं, बल्कि एक नारी (स्त्री) के स्वरूप में विराजमान हैं?

कड़े विधिक और धार्मिक नियमों के पालन के साथ सदियों से पूजे जा रहे इस विहंगम विग्रह की गाथा बेहद कौतूहल पैदा करने वाली है। आइए जानते हैं दुनिया के इस एकमात्र ‘देवी हनुमान’ मंदिर की अद्भुत पौराणिक कथा और इसके पीछे का रहस्य।

छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में है यह सिद्ध पीठ

यह अलौकिक और चमत्कारी मंदिर छत्तीसगढ़ की न्यायधानी कहे जाने वाले बिलासपुर शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक व धार्मिक नगरी रतनपुर में स्थित है। स्थानीय भक्तों और पुरातत्वविदों के अनुसार, यहाँ स्थापित हनुमान जी की यह दिव्य प्रतिमा अत्यंत प्राचीन है, जिसे लगभग 10,000 वर्ष पुराना माना जाता है। इस क्षेत्र में मां महामाया देवी का भी विख्यात मंदिर है, जिसके कारण इस पूरी नगरी को एक सिद्ध विधिक धार्मिक क्षेत्र का दर्जा प्राप्त है।

जब राजा पृथ्वी देवजू को बजरंग बली ने दिए सपने में दर्शन

इस अनोखे मंदिर के निर्माण और हनुमान जी के नारी स्वरूप में प्रकट होने के पीछे एक बेहद दिलचस्प और विधिक पौराणिक इतिहास छिपा है:

कुष्ठ रोग से मुक्ति और महामाया कुंड का विहंगम रहस्य:

  • राजा की अगाध भक्ति: सदियों पहले रतनपुर पर राजा पृथ्वी देवजू का शासन था। वे बेहद प्रतापी राजा थे लेकिन एक गंभीर शारीरिक कष्ट यानी कुष्ठ रोग (Leprosy) से पीड़ित थे। वे बजरंग बली के परम भक्त थे और दिन-रात उनकी विधिक सेवा में लीन रहते थे।
  • स्वप्न में मिला आदेश: एक रात संकटमोचन हनुमान जी ने राजा के स्वप्न में आकर दर्शन दिए और उन्हें अपने रोग की विधिक निवृत्ति तथा आत्म-कल्याण के लिए एक भव्य मंदिर निर्माण कराने का आदेश दिया।
  • कुंड से विग्रह का प्राकट्य: राजा ने तत्काल मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया। जब मंदिर बनकर पूर्ण होने वाला था, तब हनुमान जी ने पुनः स्वप्न में आकर राजा से कहा कि पास ही स्थित ‘महामाया कुंड’ (तालाब) के भीतर उनकी एक दिव्य प्रतिमा दबी हुई है, उसे निकालकर गर्भगृह में स्थापित किया जाए।
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    स्त्री रूप देख अचंभित रह गए थे लोग, राजा का ठीक हुआ रोग

    घटनाक्रम के चरण विधिक व धार्मिक प्रक्रिया (The Divine Sequence)
    मंदिर निर्माण राजा पृथ्वी देवजू ने हनुमान जी के आदेशानुसार तय स्थान पर मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया।
    दूसरा स्वप्न जैसे ही मंदिर का शिखर कार्य पूरा होने वाला था, बजरंग बली ने दोबारा राजा के सपने में आकर कहा कि पास ही स्थित ‘महामाया कुंड’ (तालाब) के भीतर मेरी एक प्राचीन प्रतिमा दबी है, उसे बाहर निकालो।
    स्त्री रूप का प्रकटीकरण राजा ने तत्काल सैनिकों और विधिक पुरोहितों को भेजकर तालाब से मूर्ति बाहर निकलवाई। लेकिन जैसे ही प्रतिमा जल से बाहर आई, वहां मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया। हनुमान जी की वह विहंगम मूर्ति पूर्णतः एक स्त्री स्वरूप में थी।

    पूरी होती है हर मुराद

    सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार यह समस्त संसार का इकलौता ऐसा विधिक स्थान है, जहां हनुमान जी की पूजा ‘देवी’ के रूप में की जाती है। इस मंदिर के प्रति न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की अटूट और गहरी आस्था है।

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