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रसोई में चप्पल पहनना पड़ सकता है भारी, घर की सुख-समृद्धि पर लगता है ब्रेक, आज ही अपनाएं ये नियम

रसोई में चप्पल पहनना पड़ सकता है भारी, घर की सुख-समृद्धि पर लगता है ब्रेक, आज ही अपनाएं ये नियम

वास्तु शास्त्र और सनातन मान्यताओं के अनुसार, रसोई में जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश करना केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर वास्तु दोष है। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 25 Apr 2026 05:10:45 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Apr 2026 05:10:45 PM (IST)

किचन में जूते-चप्पल ले जाने से रूठ जाती हैं मां अन्नपूर्णा। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. रसोई में चप्पल पहनना बन सकता है कंगाली का कारण
  2. किचन में जूते-चप्पल ले जाने से रूठ जाती हैं मां अन्नपूर्णा
  3. घर की सुख व समृद्धि चाहिए तो आज ही बदलें ये आदत

धर्म डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और मॉडर्न लाइफस्टाइल में हम अक्सर अपने पूर्वजों द्वारा बनाए गए नियमों को अंधविश्वास मानकर छोड़ देते हैं। इन्हीं में से एक नियम है रसोई में जूते-चप्पल पहनकर न जाना। वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई घर को अन्नपूर्णा कक्ष का दर्जा दिया गया है, जहां साक्षात अग्नि देव और मां अन्नपूर्णा का वास होता है।

भारतीय परंपरा में रसोई केवल भोजन बनाने का स्थान नहीं, बल्कि घर की सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है। वास्तु शास्त्र और सनातन मान्यताओं के अनुसार, रसोई में जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश करना केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर वास्तु दोष है। आइए जानते हैं क्यों रसोई में नंगे पैर जाना आपके जीवन में खुशहाली ला सकता है।

1. देवत्व और पवित्रता का अपमान

वास्तु विज्ञान के अनुसार, चूल्हा और अग्नि को पवित्र माना गया है। जिस तरह मंदिर में प्रवेश से पहले हम जूते बाहर उतारते हैं, ठीक उसी तरह रसोई को भी मंदिर के समान शुद्ध रखना चाहिए। बाहर की धूल और गंदगी लेकर चप्पल पहनकर चूल्हे के पास जाना अग्नि देव और मां अन्नपूर्णा का अनादर माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर की ‘बरकत’ चली जाती है और परिवार में दरिद्रता का वास होने लगता है।

2. ग्रहों की चाल और गृह-क्लेश

ज्योतिष शास्त्र में जूते-चप्पलों का सीधा संबंध शनि और राहु से बताया गया है। रसोई अग्नि का स्थान है, जिसका प्रतिनिधित्व मंगल और सूर्य जैसे उग्र ग्रह करते हैं। जब शनि और राहु की प्रतीकात्मक अशुद्धता (चप्पल) इस पवित्र अग्नि स्थान पर पहुंचती है, तो ग्रहों का संतुलन बिगड़ जाता है। इसका परिणाम घर में अनावश्यक तनाव, मानसिक क्लेश और कानूनी विवादों के रूप में सामने आ सकता है।

जब अगर नंगे पैर रहना हो मुश्किल

आजकल कई लोग स्वास्थ्य कारणों या ठंडी फर्श की वजह से नंगे पैर नहीं रह पाते। ऐसे में वास्तु शास्त्र कुछ रियायतें और समाधान भी सुझाता है:

  • रसोई के लिए ऐसी चप्पलें अलग रखें जो बिल्कुल नई और साफ हों। इन चप्पलों को पहनकर कभी भी घर से बाहर या शौचालय की तरफ न जाएं।
  • सबसे उत्तम मार्ग यही है कि रसोई में प्रवेश से पहले पैर धोए जाएं। इससे न केवल वास्तु दोष दूर होता है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी भोजन की शुद्धता बनी रहती है।

यह भी पढ़ें- बच्चों का दाह संस्कार क्यों नहीं होता? गरुड़ पुराण में छिपी है दफनाने की असली वजह

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

रसोई में नंगे पैर जाना केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि हम अपने ‘अन्न’ और उसे पकाने वाले ‘साधनों’ के प्रति कितना सम्मान रखते हैं। घर में धन-धान्य की निरंतरता और मानसिक शांति के लिए रसोई की पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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