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Chaturmas 2025: 6 जुलाई को साध्य योग में शुरू होगा चातुर्मास, 4 माह धर्म-अध्यात्म-तीर्थाटन में बीतेगा समय, त्योहारों की लगेगी झड़ी

Chaturmas 2025: 6 जुलाई को साध्य योग में शुरू होगा चातुर्मास, 4 माह धर्म-अध्यात्म-तीर्थाटन में बीतेगा समय, त्योहारों की लगेगी झड़ी

6 जुलाई रविवार के दिन विशाखा नक्षत्र में चातुर्मास का आरंभ हो रहा है। इसी दिन साध्य योग और वणिज उपरांत बव करण भी है। इस दौरान ज्ञात व अज्ञात दोषों से निवृत्ति मिलती है और भाग्योन्नति होती है।

By Himadri Singh Hada

Publish Date: Thu, 19 Jun 2025 11:27:53 AM (IST)

Updated Date: Thu, 19 Jun 2025 11:34:59 AM (IST)

Chaturmas 2025: 6 जुलाई से धर्म, तीर्थ और पर्वों से भरे चातुर्मास का शुभारंभ।

HighLights

  1. 6 जुलाई से पर्वों से भरे चातुर्मास का शुभारंभ।
  2. 4 महीने भक्ति, व्रत, तीर्थ यात्रा का विशेष योग
  3. त्योहारों की झड़ी, मांगलिक कार्यों पर विराम।

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। Chaturmas 2025: पंचांग की गणना के अनुसार 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन साध्य योग में चातुर्मास का आरंभ होगा। आने वाले चार माह श्रद्धालुओं का समय धर्म, अध्यात्म, तीर्थाटन में बीतेगा। आस्थावान व्रत, अनुष्ठान व चातुर्मास के नियमों का पालन करेंगे। हिंदू धर्म परंपरा में चातुर्मास के चार माह त्योहारों की झड़ी भी लगेगी और भक्त पर्व त्योहार मनाएंगे। चातुर्मास के चार माह विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे। 2 नवंबर को देव उठने के बाद एक बार फिर मांगलिक कार्य शुरू होंगे।

विशाखा नक्षत्र में चातुर्मास का आरंभ

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया सनातन हिंदू धर्म परंपरा में देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत मानी गई है। इसे चौमासा व वर्षावास भी कहते हैं। धर्मशास्त्र में चातुर्मास के चार महीने धर्म, अध्यात्म के बारे में बताया गया है। इस दौरान भक्तों को तीर्थाटन, दान, धर्म, उपवास, भागवत पारायण करते हुए पुण्यों का संचय करना चाहिए। इससे इष्ट देव की कृपा होती है। साथ ही, ज्ञात व अज्ञात दोषों से निवृत्ति मिलती है और भाग्योन्नति होती है।

इस बार 6 जुलाई रविवार के दिन विशाखा नक्षत्र में चातुर्मास का आरंभ हो रहा है। इसी दिन साध्य योग और वणिज उपरांत बव करण भी है। तुला राशि के चंद्रमा की साक्षी में चातुर्मास का आरंभ विशेष लाभप्रद रहेगा। एक मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा वाले दिन से भी चातुर्मास के आरंभ की मान्यता बताई जाती है। तीर्थाटन एवं सत्संग का विशेष लाभ चातुर्मास में भगवत भजन, यम, नियम, संयम से मन और बुद्धि को साधते हुए भगवद आराधना करना चाहिए।

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साधक तीर्थ पर जाकर कल्पवास का करते हैं व्रत

कई साधक तीर्थ पर जाकर कल्पवास का व्रत लेते हैं और 42 दिन, डेढ़ महीना या 3 महीना स्वयं को साधने का प्रयास करते हैं। इसका वैज्ञानिक एवं धार्मिक लाभ भी प्राप्त होता है। धार्मिक दृष्टिकोण में प्रबलता आती है। इसलिए चातुर्मास के चार माह तीर्थों का भ्रमण करते हुए देव, दर्शन, सत्संग, रामायण, श्रीमद भागवत सहित अन्य सदग्रंथों का पठन पाठन विशेष शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है।

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4 महीनों में आने वाले त्योहार

चातुर्मास में यह व्रत त्योहार खास पंचांग की गणना के अनुसार चातुर्मास के व्रत त्योहार गुरु पूर्णिमा से आरंभ होकर जया पार्वती का व्रत, महाकालेश्वर की सवारी, कामदा एकादशी, हरियाली अमावस्या, नाग पंचमी, कल्कि जयंती, तुलसीदास जयंती, स्वतंत्रता दिवस, पवित्रा एकादशी, रक्षाबंधन , कजली तीज, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गोगा नवमी, अजा एकादशी, गोवत्स द्वादशी, कुशोत्पाटिनी अमावस्या, पिठोरा अमावस्या, रामदेव बीज, सामवेदियों का उपाकर्म, हरितालिका तीज, पार्थिव गणेश की स्थापना, ऋषि पंचमी, सूर्य छठ, संतान सप्तमी, तेजा दशमी, वामन जयंती, अनंत चौदस, महालय श्राद्ध, अश्विनी नवरात्र, दशहरा, शरद पूर्णिमा, करवा चौथ, अहोई अष्टमी, धनतेरस, नरकहरा चतुर्दशी, दीपावली, भाई दूज, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, सौभाग्य पंचमी, पांडव पंचमी, सूर्य छठ, गोपाष्टमी, आंवला नवमी, देवउठनी एकादशी, बैकुंठ चौदस, कार्तिक की पूर्णिमा। यह सभी प्रमुख त्योहार इन चार माह में आते हैं।

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