वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मंदिर में कुछ देवी-देवताओं की प्रतिमाएं या तस्वीरें एक साथ रखने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है। इससे घर में कलह, धन हानि और अशांति बढ़ने की आशंका रहती है। शिवलिंग, शालिग्राम, हनुमान-शनि और मां काली-लक्ष्मी को साथ रखने से बचना चाहिए।
By Anurag Mishra
Publish Date: Sun, 10 Aug 2025 10:12:56 AM (IST)
Updated Date: Sun, 10 Aug 2025 10:12:56 AM (IST)

HighLights
- एक से अधिक शिवलिंग रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- दो शालिग्राम भगवान रखने से वास्तु दोष उत्पन्न होता है।
- मां काली और मां लक्ष्मी का संगम अशुभ माना जाता।
धर्म डेस्क, इंदौर। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मंदिर घर की सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। मान्यता है कि मंदिर से निकलने वाली सकारात्मकता पूरे घर में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आती है। कुछ देवी-देवताओं की प्रतिमा या तस्वीरें एक साथ रखने से यह ऊर्जा बाधित हो सकती है, जिससे नकारात्मकता, कलह और आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
वास्तु नियमों के अनुसार जानना जरूरी है कि किन देवी-देवताओं को एक साथ नहीं रखना चाहिए…
न देवी देवताओं की प्रतिमा घर के मंदिर में साथ न रखें
ज्योतिष शास्त्र में घर में शिवलिंग रखने से मना किया गया है। उसके बाद भी कोई भक्त रख लेता है, तो इसके नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। शास्त्रों में कहा गया है कि घर मके मंदिर में एक से अधिक शिवलिंग नहीं होने चाहिए। यह आपके घर में नकारात्मकता बढ़ाएंगे, जिससे तरक्की के रास्ते बंद हो जाएंगे।
शालिग्राम भगवान
ज्योतिष शास्त्र की मानें तो घर में दो शालिग्राम भगवान को नहीं रखना चाहिए। यह घर में वास्तु दोष का कारण बन सकता है, जिससे घर की सुख-शांति बाधित हो सकती है। भगवान विष्णु के क्रोध को भी झेलना पड़ सकता है।
हनुमान जी और शनि देव
घर के मंदिर में कभी भी एक साथ हनुमान जी और शनि देव की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। दोनों को एक-दूसरे का दुश्मन माना जाता है। ऐसे में यह आपके घर की सुख-शांति के लिए अच्छा नहीं रहेगा। घर में शनि देव की मूर्ति ही नहीं रखनी चाहिए।
अस्वीकरण : इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।







