नवरात्रि और दुर्गा पूजा दोनों ही पर्व देवी दुर्गा की उपासना और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक हैं, लेकिन दोनों की परंपराओं और पूजन विधान में बड़ा अंत…और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 11:44:27 AM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 12:01:28 PM (IST)
धर्म डेस्क। सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा दोनों ही आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना और असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक महापर्व हैं। यद्यपि दोनों पर्व एक ही आश्विन माह की तिथियों में आते हैं और कई लोग इन्हें एक ही मान लेते हैं, परंतु धार्मिक मान्यताओं, पूजन की परंपरा, विधि और सांस्कृतिक स्वरूप की दृष्टि से इनमें महत्वपूर्ण अंतर है।
जहां नवरात्रि नौ दिनों तक चलने वाली ‘नवदुर्गा’ के नौ स्वरूपों की व्यक्तिगतऔरआध्यात्मिक साधना है, वहीं दुर्गा पूजा विशेष रूप से पूर्वी भारत (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, त्रिपुरा) का एक विशाल सामूहिक और सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव है।
आइए समझते हैं दोनों पर्वों के बीच के मुख्य अंतर और इस साल (2026) के दुर्गा पूजा कैलेंडर की सटीक तिथियां-
अवधि और तिथि का अंतर
- शारदीय नवरात्रि: यह महापर्व आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि (घटस्थापना) से शुरू होकर नवमी तक यानी पूरे 9 दिनों तक चलता है। इसके बाद 10वें दिन विजयादशमी (दशहरा) मनाया जाता है। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर (रविवार) से हुआ है और इसका समापन 19 अक्टूबर (अष्टमी/नवमी) तथा दशमी 21 अक्टूबर को होगा।

दुर्गा पूजा कैलेंडर 2026
पूर्वी भारत और भव्य पूजा पंडालों में आयोजित होने वाली दुर्गा पूजा 2026 की तिथियां निम्नलिखित हैं-
- 16 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार): षष्ठी पूजा- बिल्व निमंत्रण, कल्पारंभ, अकाल बोधन, आमंत्रण और अधिवास। (इसी दिन से मुख्य उत्सव का शुभारंभ होता है)।
- 17 अक्टूबर 2026 (शनिवार): महासप्तमी पूजा- नवपत्रिका पूजा (कोलाबोऊ पूजा/केले के पौधे का स्नान और पूजन)।
- 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार): महाअष्टमी पूजा- कुमारी पूजा और अति-पवित्र ‘संधि पूजा’ (अष्टमी और नवमी के संधिकाल में होने वाला पूजन)।
- 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार): महानवमी पूजा- बंगाल महा नवमी, दुर्गा बलिदान और हवन।
- 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार): विजयादशमी- प्रतिमा विसर्जन, सिंदूर उत्सव (‘सिंदूर खेला’) और शुभो बिजया का आदान-प्रदान।
नवरात्रि व्यक्ति की आंतरिक शक्ति, उपवास और नवदुर्गा की उपासना का पर्व है; जबकि दुर्गा पूजा मां के महिषासुरमर्दिनी रूप के पृथ्वी लोक पर पधारने और एक बेटी के मायके आगमन का भव्य उत्सव है। यही हमारी सनातन संस्कृति की विविधता और सुंदरता है।
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