धर्म डेस्क। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक चलने वाला पितृ पक्ष (महालय श्राद्ध) पूर्वजों की आत्मा की शांति, तृप्ति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। इस अवधि में पितरों के नाम से तर्पण, पिंडदान, दान-पुण्य और सात्विक कर्म किए जाते हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान घर की सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ज्योतिषाचार्य श्रीपति त्रिपाठी के अनुसार, इस दौरान घर की महिलाओं को 6 विशेष बातों और नियमों का ध्यान रखना चाहिए ताकि पितरों की कृपा सदैव परिवार पर बनी रहे:
1. दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक
पितृ पक्ष के दौरान प्रतिदिन संध्याकाल में घर के बाहर दक्षिण दिशा (पितरों की दिशा) की ओर एक सरसों के तेल का दीपक जलाने का विधान है। यदि आप अपार्टमेंट या फ्लैट में रहते हैं, तो घर की बालकनी में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक रख सकते हैं। इससे पितरों का मार्ग प्रशस्त होता है।
2. मासिक धर्म के दौरान न बनाएं श्राद्ध का भोजन
धार्मिक शुद्धता और पवित्रता के नियमों के अनुसार, मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान महिलाओं को श्राद्ध, तर्पण या पंचबली का भोजन नहीं बनाना चाहिए। ऐसी स्थिति में घर की किसी अन्य महिला या पुरुष सदस्य द्वारा ही श्राद्ध का सात्विक भोजन तैयार कराया जाना चाहिए।
3. शाम के वक्त न करें घर की सफाई (झाड़ू न लगाएं)
पितृ पक्ष के दौरान सूर्यास्त के समय यानी शाम को घर में झाड़ू लगाने या कचरा बाहर फेंकने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि संध्या काल में घर में नकारात्मकता दूर करने और शुद्धता बनाए रखने के लिए झाड़ू-पोछा जैसे सफाई कार्य सुबह के समय ही निपटा लेने चाहिए।
4. प्रतिदिन भोजन का पहला हिस्सा गाय के लिए निकालें
पितृ पक्ष की प्रत्येक तिथि पर रसोई में भोजन बनाते समय सबसे पहले उसका एक हिस्सा (गोग्रास) पितरों के नाम से अलग निकालें। इस भोजन को श्रद्धापूर्वक गाय को खिलाने की परंपरा है। इससे पितृ प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
5. श्राद्ध तिथि पर पितरों का प्रिय भोजन बनाएं
पूर्वज की जिस निश्चित तिथि (प्रतिपदा से अमावस्या तक) पर श्राद्ध या तर्पण हो, उस दिन उनकी पसंद का सात्विक भोजन (जैसे खीर, पूड़ी, सब्जी आदि) विशेष रूप से बनाना चाहिए। तत्पश्चात ब्राह्मणों, गाय, कौवे और कुत्ते (पंचबली भोग) को अर्पित करने के बाद ही स्वयं ग्रहण करना चाहिए।
6. घर में वाद-विवाद और क्रोध से बचें
श्राद्ध पक्ष के दौरान घर में आपसी प्रेम, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखना बेहद जरूरी है। महिलाओं एवं परिवार के सभी सदस्यों को अकारण क्रोध, क्लेश या वाद-विवाद से बचना चाहिए। जिस घर में शांति और सम्मान रहता है, वहीं पितरों का वास और आशीर्वाद बना रहता है।







