प्रणय चौहान, इंदौर। इस बार शारदीय नवरात्र सप्तमी की वृद्धि होने से नौ नहीं, दस दिन की होगी। महानवमी और विजयादशमी का पर्व एक ही दिन मनेगा। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र में 17 और 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि रहेगी।
19 अक्टूबर को अष्टमी एवं 20 अक्टूबर को नवमी और विजयादशमी का पर्व एक साथ मनाया जाएगा। नवरात्र के दौरान नवदुर्गा के साथ दस महाविद्याओं की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा।
ज्योतिषियों ने बताया कि कुछ पंचांगों में मतभेद के चलते अष्टमी एवं दुर्गानवमी का पर्व एक ही दिन अर्थात् 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दुर्गा नवमी का बलिदान 20 अक्टूबर मंगलवार को होगा।
नवरात्र का शुभारंभ 11 अक्टूबर को पद्म योग एवं बुद्धादित्योग, चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग में होगा। वहीं, प्रतिपदा तिथि रात्रि 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगी।
ज्योतिषी पं. हितेश व्यास ने बताया कि चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग के चलते घटस्थापना अभिजित मुहूर्त में करना शुभ रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार रविवार और सोमवार को नवरात्र प्रारंभ होने पर माता का आगमन हाथी पर माना जाता है।
हाथी को वर्षा का प्रतीक माना गया है, इसलिए कहीं-कहीं जोरदार वर्षा के योग बताए जा रहे हैं। इस वर्ष सप्तमी तिथि दो दिन रहेगी।
17 अक्टूबर शनिवार और 18 अक्टूबर को प्रातः 8.27 मिनट तक रहेगी। दुर्गा अष्टमी का पर्व 19 अक्टूबर सोमवार को रहेगा। महानवमी का पर्व 20 अक्टूबर मंगलवार को होगा।
नवमी तिथि दोपहर 12.49 बजे तक रहेगी। इसी दिन श्रवण नक्षत भी रहेगा और अपराह्न में विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। दशमी तिथि 21 अक्टूबर बुधवार को 2.11 मिनट तक रहेगी।
अष्टमी को हवन, नवमी को कुलदेवी पूजन
अष्टमी के दिन देवी मंदिरों और घरों में हवन-पूजन होगा। अधिकांश परिवारों में अष्टमी व नवमी के दिन कुलदेवी के पूजन की परंपरा है। इस बार नवमी के साथ ही विजयादशमी होने से दोनों पर्वों की धार्मिक परंपराएं एक ही दिन निभाई जाएंगी। नवरात्र के 10 दिनों में देवी के विभिन्न स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं के पूजन की परंपरा भी निभाई जाएगी। साधक और श्रद्धालु परंपरानुसार देवी आराधना, जप, पाठ और अनुष्ठान करेंगे। तिथियों की घट-बढ़ विशेष स्थिति के कारण नवरात्र का धार्मिक स्वरूप सामान्य नौ दिनी क्रम से अलग रहेगा।
ये हैं नवरात्र की तिथियां
11 अक्टूबर: प्रतिपदा, घटस्थापना और प्रथम दिन (शैलपुत्री), 12 अक्टूबर: द्वितीया (ब्रह्मचारिणी), 13 अक्टूबर: तृतीया (चंद्रघंटा), 14 अक्टूबर: चतुर्थी (कूष्मांडा), 15 अक्टूबर: पंचमी (स्कन्द माता), 16 अक्टूबर: षष्ठी (कात्यायनी), 17 अक्टूबर: सप्तमी (कालरात्रि), 18 अक्टूबर: सप्तमी (कालरात्रि), 19 अक्टूबर: अष्टमी (महागौरी), 20 अक्टूबर: नवमी (सिद्धिदात्री) और विजयादशमी।







