हरिवंश पुराण के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए। इस दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लगने की मान्यता है।
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 12:30:49 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 12:35:14 PM (IST)
HighLights
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए।
- चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लगने की मान्यता है।
- भगवान कृष्ण ने भी भूलवश चंद्र दर्शन कर लिया था।
ग्वालियर। गेरू वाला बंगला, त्यागी नगर मुरार में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का रविवार को सातवें दिन विश्राम हुआ। अंतिम दिवस कथा व्यास पं. सतीश कौशिक ने श्रद्धालुओं को गणेश चतुर्थी के पौराणिक महत्व से अवगत कराया और सुदामा चरित्र का मार्मिक प्रसंग सुनाया।
पं. कौशिक ने बताया कि हरिवंश पुराण के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए। इस दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लगने की मान्यता है। भगवान कृष्ण ने भी भूलवश चंद्र दर्शन कर लिया था, जिसके बाद उन पर स्यमंतक मणि चोरी का मिथ्या आरोप लगा था।
उन्होंने कहा कि यदि भूलवश चंद्र दर्शन हो जाए तो स्यमंतक मणि की कथा का श्रवण करना चाहिए। इस दिन गणेश जी की विधि-विधान से पूजा, दूर्वा अर्पित करने और मोदक का भोग लगाने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
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इसके बाद उन्होंने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता सच्ची मित्रता की मिसाल है। सुदामा की गरीबी देखकर कृष्ण ने बिना मांगे ही उनकी सहायता की। मित्रता में लेन-देन नहीं, बल्कि भावनाओं का महत्व होता है। प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए।
मन को निर्मल कर देती है कथा
इस अवसर पर भाजपा के सह राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने भी कथा श्रवण कर व्यासपीठ से आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा मन की मलिनता को दूर कर अंतर्मन को निर्मल करती है।कथा परीक्षित रामसिंह यादव, भाजपा नेता लोकेंद्र पाराशर, रामबाबू यादव, अजय यादव, मुकेश दुबे, रिंकू यादव, गिर्राज दुबे, अंकित यादव और निक्की यादव सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया।







